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आपका इस्मे गिरामी

आप का नामे नामी व इस्मे गिरामी ?मुहम्मद? ?और मशहूर लक़ब ?महदी? है। उलमा का कहना है कि आपका नाम ज़बान पर जारी करने की मुमानिअत है।

अल्लामा मजलिसी इसकी ताईद करते हुए फ़रमाते है कि ?हिकमते आन मख़्फ़ी अस्त? यानी इसकी वजह पोशीदा और ग़ैर मालूम है।

?(जिला उल अयून)

उलमा का बयान है कि आपका नाम ख़ुद हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम ने रखा था। मुलाहेज़ा हो रौज़तुल अहबाब व यनाबि उल ?मवद्दत।

मुवर्रिख़े आज़म मिस्टर ज़ाकिर हुसैन तारीख़े इस्लाम जल्द 1, सफ़ा 31 में लिख़ते है कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम ने फ़रमाया कि मेरे बाद बारह ख़लीफ़ा कुरैश से होंगे। आपने फ़रमाया कि आख़िरे ज़मान में जब दुनिया जुल्मो जौर से भर जायेगी, तो मेरी औलाद में से महदी का ज़हूर होगा जो ज़ुल्मो जौर को दूर करके दुनिया को अदलो इंसाफ़ से भर देगा, शिर्क व कुफ़्र को दुनिया से नाबूद कर देगा, उसका नाम ?मुहम्मद? और लक़ब ?महदी? होगा। हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान से उतर कर उसकी नुसरत करेंगे और उनके पीछे नमाज़ पढ़ेंगे और वह दज्जाल को कत्ल करेंगे।

आप की कुन्नियत

इस पर उलमा -ए- फ़रीक़ैन का इत्तेफ़ाक़ है कि आपकी कुन्नियत ?अबुल क़सिम? और अबू अबदुल्लाह थी। उलमा इस बात पर भी मुत्तफ़िकक है कि अबुल क़ासिम कुन्नियत ख़ुद सरवरे कायनात ने तजवीज़ फ़रमाई है। मुलाहेज़ा हो!

(जाम ?ए- सग़ीर सफ़ा 104, तज़किर ?ए- ख़वास उल उम्मत, सफ़ा 204, रौज़तुश शोहदा, सफ़ा 439, सवाइक़े मुहर्रिक़ा सफ़ा 134, शवाहदुन नुबूव्वत सफ़ा 312, कशफ़ुल ग़ुम्मा सफ़ा 130, जिला उल अयून, सफ़ा 298)

यह मुसल्लेमात में से है कि ?रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि महदी का नाम मेरा नाम और उसकी कुन्नियत मेरी कुन्नियत होगी। लेकिन इस रिवायत में बाज़ अहले इस्लाम ने यह इज़ाफ़ा किया है कि आप ने यह भी फ़रमाया है कि महदी के बाप का नाम मेरे वालिदे मोहतरम का नाम होगा। मगर हमारे रावियों ने ऐसी कोई रिवायत नही की और ख़ुद तिरमिज़ी शरीफ़ में भी ?इस्मे अबीह असमे अबी? नही है। ताहम बक़ौल साहेबुल मनाक़िब अल्लामा कन्जी शाफ़ेई यह कहा जा सकता है कि रिवायत में लफ़ेज़े अबीह से मुराद अबु अब्दिल्लाह -अल- हुसैन है। यानि इससे इस अम्र कि तरफ़ इशारा है कि इमाम महदी अलैहिस्सलाम हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की औलाद से हैं।