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हज़रत इमाम मुहम्मद महदी अलैहिस्सलाम

हज़रत इमाम मुहम्मद महदी अलैहिस्सलाम सिलसिल ? ए- इस्मते मुहम्मदिया की चौदहवीं और सिल्के इमामते अलविया की बारहवीं कडी है। आपके वालिदे माजिद हज़रत इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम और वालेदा -ए- माजेदा जनाबे नरजिस ख़ातून थीं।

आप अपने आबा व अजदाद की तरह इमामे मंसूस, मासूम, आ-लमे ज़माना और अफ़ज़ले कायनात हैं। आप बचपन ही में इल्मो हिकमत से भर पूरे थे।

(सवाइक़े मुहर्रेका सफ़ा 124)

आपको पाँच साल की उम्र में वैसी ही हिकमत दे दी गयी थी, जैसी हज़रत याहिया को मिली थी। आप बतने मादर में उसी तरह इमाम क़रार दिये गये थे, जिस तरह हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम नबी क़रार पाये थे।

? ( कशफ़ुल ग़ुम्मा सफ़ा 130)

आप अम्बिया से बेहतर हैं। (ओसाफ -उर- राग़ेबीन, सफा 128) आपके मुताअल्लिक़ हज़रत रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम ने बे शुमार पेशीन गोइयाँ फ़रमाई है और इसकी वज़ाहत की है कि आप हुज़ूर की इतरत और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की औलाद से होंगे।

(जाम ? ए- सग़ीर सियूती, सफ़ा 130 तबा मिस्र सफ़ा 122 व मुसनद अहमद बिन हम्बल जिल्द 1, सफ़ा 84 तबा मिस्र व कन्जुल हक़ाइक़, सफ़ा 122 व मुस्तदरक जिल्द 4, सफ़ा 520 व मिशकात शरीफ़)

आपने यह भी फ़रमाया कि आप का ज़हूर आखिरी ज़माने में होगा और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम उनके पीछे नमाज़ पढ़ेगें।

(सही बुखारी सफ़ा 399 व सही मुसलिम जिल्द 2, सफ़ा 95, सही तिर्मिज़ी सफ़ा 270 व सही अबू दाऊद जिल्द 2, सफ़ा210 व सही इब्ने माजा सफ़ा 204 व सफ़ा 309 व जाम ? ए- सग़ीर सफ़ा 134 व अनवार उल हक़ाइक़ सफ़ा 90)

?आपने यह भी कहा कि इमाम महदी अलैहिस्सलाम मेरे ख़लीफ़ा की हैसियत से ज़हूर करेंगें और ? यख़तिमु अद्दीना बिही कमा फ़तेह बिना ? जिस तरह मेरे ज़रिये से दीने इस्लाम का आग़ाज़ हुआ उसी तरह उनके ज़रिये से मुहरे इख़तेताम लगा दी जायेगी।

? (कन्ज़ुल हक़ाइक़ सफ़ा 209)

आपने इसकी भी वज़ाहत फ़रमाई है कि इमाम महदी का असल नाम मेरे नाम की तरह मुहम्मद और कुन्नियत मेरी कुन्नियत की तरह ? अबुल क़ासिम ? होगी। जब वह ज़हूर करेंगे तो सारी दुनिया को अदल? व इंसाफ़ से उसी तरह पुर कर देगें, जिस तरह वह उस वक़्त ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

(जामाए सग़ीर, सफ़ा 104 व मुस्तदरिक इमाम हाकिम सफ़ा 422 व 415) ज़हूर के बाद उनकी फ़ौरन बैअत करनी चाहिये क्योंकि वह ख़ुदा के ख़िलाफ़ा होंगे।

(सुनने इब्ने माजा उर्दू सफ़ा 261 तबा कँराची, 1377 हिजरी)