हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का नामे नामी तमाम आसमानी
किताबों तौरैत, ज़बूर, इन्जील में मौजूद है।
क़ुरआने करीम की कई आयात में आपके बारे में तफ़्सीर व तावील
की गई है।
पैगम्बरे इस्लाम (स.) की ज़बाने मुबारक से मक्के, मदीने में,
मेराज के मौक़े पर और दूसरी मुनासेबतों पर तमाम ही आइम्मा-ए मासूमीन के बारे
मुख़तलिफ़ हदीसे जारी हुई हैं।
अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने भी अपने बेटे महदी
का ज़िक्र किया और हज़रत ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा ने भी इमाम महदी का तज़केरा
फ़रमाया है। इसी तरह हज़रत इमाम हसन और हज़रत इमाम हुसैन हज़रत इमाम सज्जाद
हज़रतिमाम बाक़िर हज़रत इमाम सादिक़ हज़रत इमाम रिज़ा हज़रत इमाम मुहम्द तक़ी
हज़रत इमाम अली नक़ी व हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिमु अस्सलाम ने भी अपने बेटे इमाम
महदी का ज़िक्र किया है।
पैग़म्बरे इस्लाम (स.) के असहाब में से अबू बकर, उमर,
उस्मान, अब्दुल्लाह इब्ने उमर, अबू हुरैरा, समरा बिन जुन्दब, सलमान, अबुज़र, अम्मार
और इनके अलावा भी बहुत से असहाब ने हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र किया
है।
पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की बीवियों में से आइशा, हफ़सा,
उम्मे सलमा और कई दूसरी बीवियों ने हज़रत इमाम महदी का ज़िक्र किया है।
ताबेईन में औन बिन हुजैफ़ा, इबादियः बिन रबी और क़ुतादा
जैसे अफ़राद ने इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र किया है।
तफ़्सीर की किताबों में से, तफ़्सीरे तबरी, तफ़्सीरे राज़ी,
तफ़्सीरुल ख़ाज़िन, तफ़्सीरे आलूसी, तफ़्सीरे इब्ने असीर, तफ़्सीरे दुर्रुल मनसूर
वग़ैरह में आप हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र पायेंगे।
इसी तरह आपको सहाए सित्ता, बुख़ारी, मुस्लिम, इब्ने माजा,
अबू दाऊद, निसाई और अहमद में भी हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र मिलेगा।
हदीस की दूसरी किताबें जैसे मुस्तदरके सहीहैन, मजमा उज़
ज़वाइद, मुसनदे शाफ़ई, सुनने दार क़ुतनी, सुनने बहीक़ी, मुसनदे अबी हनीफ़ा,
क़न्ज़ुल उम्माल बग़ैरा में हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का ज़िक्र मौजूद है।
तारीख़ की किताबों में से तारीख़े तबरी, तारीख़े इब्ने असीर,
तारीख़े मसूदी, तारीख़े सयूती, तीरीख़े इब्ने ख़लदून वग़ैरा में भी हज़रत इमाम
महदी अलैहिस्सलाम के बारे में लिखा गया है।
मुसलमानों के मुख़तलिफ़ फ़िर्क़ों के उलमा हज़रत इमाममहदी
पर एतेक़ाद रखते हैं। उन्होंने इसका ज़िक्र अपनी किताबों, ख़ुत्बों वग़ैरा में
कसरत से किया है। इन उलमा में हनफ़ी, शाफ़ी, हम्बली और मालकी सभी शामिल हैं। इनके अलावा
भी दूसरे मज़हबों के उलमा और उनके मानने वालों ने हज़रत का ज़िक्र किया है।
क़ुरआनी मुक़ारेनत
क़ुरआने करीम पर तहक़ीक़ी नज़र डालने से हम इन नतीजों पर
पहुँचते हैं।
क़ुरान में इस्लाम के सबसे अहम फ़रीज़े, नमाज़ का ज़िक्र
है, पैग़म्बरे इस्लाम(स.) ने इसके बारे में फ़रमाया कि
1.महदी
(अ.) इमाम और ईसा मामूम होंगे
अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह
सल्लाहु अलैहि वा आलिहि वसल्लम ने बयान फ़रमाया: यक़ीनन मेरे बाद मख़लूक़ पर
अल्लाह की जानिब से मेरे बारह ख़ुलाफ़ा और औसिया हुज्जत होगें। जिनमें से पहला
मेरा भाई और आख़िरी मेरा फ़रज़न्द होगा। लोगों ने अर्ज़ की, या रसूलल्लाह आपका भाई
कौन है ? हज़रत ने फ़रमाया: अली
इब्ने अबी तालिब।
सवाल किया गया कि आपका
फ़रज़न्द कौन है ? आपने फ़रमाया मेरा फ़रज़न्द वह महदी है, जो दुनिया
को अदल व इंसाफ़ से भर देगा। बिल्कुल उसी तरह जिस तरह वह पहले ज़ुल्म व जौर से भर
चुकी होगी। उस ज़ाते पाक की क़सम जिसने मुझे हक़ के साथ बशारत देने वाला बना कर
भेजा है, अगर दुनिया सिर्फ़ एक दिन भी बाक़ी रह जायेगी तो ख़ुदावन्द उस दिन को इस
क़दर तूलानी कर देगा कि मेरा फ़रज़न्द ज़हूर करे और रूहूल्लाह ईसा इब्ने मरियम
नाज़िल हो कर महदी की इमामत में नमाज़ अदा करेंगे और महदी के नूर से ज़मीन रौशन हो
जायेगी और उसकी हुकुमत मशरिक़ से मग़रिब तक होगी।
2.महदी (अ.) रसूलुल्लाह
(स.) के साथ जन्नत में
मदीने के एक यहूदी ने अमीरूल मोमिनीन अली इब्ने अबी तालिब (अ.)
से यह सवाल किये:
1- या अली!मुझे बताईये कि इस उम्मत के नबी (स.) के बाद कितने इमाम
होगें?
2- मुझे बताईये कि जन्नत में मुहम्मद (स.) का दर्जा कहाँ है
? और
यह भी बताईये कि मुहम्मद (स.) के साथ और कौन होगा ?
हज़रत अली (अ.) ने फ़रमाया: इस उम्मत में नबी (स.) के बाद
बारह इमाम होगें और लोगों की मुख़ालेफ़त उनको कुछ नुक़सान न पहुचा सकेगी।
यहूदी ने कहा: आपने बिल्कुल सही फ़रमाया।
हज़रत ने फिर फ़रमाया: मुहम्मद (स.) का मक़ाम जन्नते अदन
है। उसका बालाई हिस्सा परवरदिगार के अर्श से क़रीब होगा।
यहूदी ने अर्ज़ की "आपने सही फ़रमाया"
हज़रत अली (अ.) ने फिर फ़रमाया: जन्नत में मुहम्मद (स.) के
हमराह बारह इमाम होगें, जिनका अव्वल मैं हूँ और आख़िरी क़ायम अलमहदी (अ.) हैं।
यहूदी ने अर्ज़ की: आपने सच फ़रमाया।
(किताब यनाबी उल मवद्दत)
किफ़ायतुल असर में अबी सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि वह
बयान करते हैं मैंने रसूलल्लाह (स.) को यह फ़रमाते सुना: मेरे अहले बैत, अहले
ज़मीन के लिए उसी तरह अमान हैं, जिस तरह आसमान वालों के लिए सितारे अमान हैं।
लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह (स.) आपके बाद आईम्मा आपके
अहलेबैत से होगें ? हज़रत ने फ़रमाया: हाँ मेरे बाद बारह इमाम होगें जिनमें से
नौ हुसैन की सुल्ब से अमीन और मासूम होगें और इस उम्मत में महदी हम ही में से
होगा। (आगाह रहो) यह सबके सब मेरे अहले बैत और मेरी औलाद से मेरे गोश्त और ख़ून
होगें। उन क़ौमों का क्या हश्र होगा जो मेरी ज़ुर्रियत व अहलेबैत के ज़रिये मुझे
अज़ियत देगें। ख़ुदावन्दे आलम ऐसे लोगो को मेरी शिफ़ाअत नसीब न करेगा।
हदीसुल मुनाशिदा
हाफ़िज़ अलक़न्दूज़ी हदीसे मुनाशिदा की रसूलल्लाह (स.) के
असहाब से रिवायत करते हैं। वह बयान करते हैं कि जिस वक़्तआयते الیوم اکملت لکم دینکم و اتممت علیکم نعمتی و رضیت
لکم الاسلام دینا नाज़िल हुई तो हुज़ूर (स.) ने
फ़रमाया अल्लाहु अकबर दीन कामिल हो गया। नेमतें तमाम हो गयीं और मेरा परवरदिगार
मेरी रिसालत और मेरे बाद अली (अ.) की विलायत से राज़ी हो गया। लोगों ने अर्ज़ की
या रसूलल्लाह यह आयतें अली (अ.) से मख़सूस हैं? हज़रत ने फ़रमाया हाँ ! यह आयतें अली और
क़ियामत तक आने वाले मेरे औसिया से मख़सूस हैं। लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह
हमारे लिए बयान फ़रमाइये हज़रत ने बयान फ़रमाया अली (अ.) मेरा भाई और मेरा वारिस व
वसी और मेरे बाद तमाम मोमीनीन का वली है। फिर मेरा फ़रज़न्द हसन, फिर हुसैन उनके
बाद हुसैन के नौ फ़रज़न्द मेरे औसिया होगें। क़ुरआन उनके साथ है और वह क़ुरआन के
साथ हैं। न यह क़ुरआन से जुदा होगें और न क़ुरआन उनसे जुदा होगा। यहाँ तक कि यह सब
के सब मेरे पास हौज़े (कौसर) पर वारिद होगें। (यहाँ तक कि हुज़ूर (स.) ने फ़रमाया)
मैं तुम्हे ख़ुदा की क़सम दे कर सवाल करता हूँ। क्या तुम जानते हो कि ख़ुदा वन्दे
आलम ने सूरए हज में इरशाद फ़रमाया है:
یا یها الذین آمنوا ارکعوا و
اسجدوا و اعبدوا ربکم و افعلوا الخیر
ऐ ईमान लाने वालो ऱूकू व सुजूद बजा लाओ (यानी नमाज़ पढो) और
सिर्फ़ अपने परवरदिगारे हक़ीक़ी की इबादत करो और नेकी करो। सूरः की बाद की आयतें
इस तरह हैं[1]
सलमान ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह वह कौन लोग हैं जिनके (आमाल
व अफ़आल) पर आपको गवाह बनाया गया है और उनको दूसरे लोगों (के आमाल व अफ़आल पर)
गवाह मुक़र्रर किया गय है, जिनको ख़ुदावन्दे आलम ने मुनतख़ब किया है और मिल्लते
इबराहीम से उन पर दीन (के मुआमलात) में किसी क़िस्म की तंगी (सख्ती) को रवा नही
रखा गया है? हज़रत ने फ़रमाया: इस अम्र से सिर्फ़ 13 हज़रात मुराद हैं।
सलमान ने अर्ज़ की (या रसूलल्लाह) इरशाद फ़रमाईये, फ़रमाया मैं और मेरे भाई और
मेरे 11 फ़रज़न्द हैं।
इमाम हम्बल बयान करते हैं: रसूलल्लाह (स.) ने हुसैन (अ.) के
लिए फ़रमाया: मेरा यह फ़रज़न्द इमाम है, इमाम का भाई और 9 इमामों का बाप है जिनमें
का आखिरी क़ाइम (अ.) है।(मुस्नद अहमद बिन हम्बल)
नासल रसूलल्लाह से सवाल करता हैं: इब्ने अब्बास का बयान है
कि नासल यहूदी पैग़म्बरे इस्लाम की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और अर्ज़ की ऐ मुहम्मद ! मैं आप से कुछ ऐसी
चीज़ों के मुतअल्लिक़ सवाल करना चाहता हूँ, जो एक ज़माने से मेरे सपने में ख़लिश
बनी हुई हैं। हज़रत ने फ़रमाया बयान करो: उसने कहा "आप मुझे अपने वसी के
बारे में बतालाइये ? इसलिए कि कोई नबी ऐसा नही गुज़रा जिसका वसी न हो। हमारे नबी
मूसा बिन इमरान ने यूशा बिन नून को अपना वसी मुक़र्रर किया।
हज़रत ने फ़रमाया: मेरे वसी अली इब्ने अबितालिब हैं और उनके
बाद मेरे दो नवासे हसन और हुसैन होगें फिर यके बाद दीगर हुसैन की औलाद से नौ इमाम
होगें।
नासल ने कहा: आप मुझे उनके नाम बताईये। हज़रत ने फ़रमाया:
हुसैन के बाद उनका फ़रज़न्द अली होगा और उनके बाद उनका फ़रज़न्द मुहम्मद होगा और
उनके बाद उनका फ़रज़न्द जाफ़र होगा और उनके बाद उनका फ़रज़न्द मूसा फिर उनका
फ़रज़न्द अली होगा फिर उनका फ़रज़न्द मुहम्मद होगा फिर उनका फ़रज़न्द अली होगा फिर
उनका फ़रज़न्द हसन होगा फिर उनका फ़रज़न्द हुज्जत मुहम्मद महदी होगा जो कि बारह
हैं।[2]
3.महदी
(अ.) का ज़हूर यक़ीनी है।
मुहम्मद बिन अली तिरमीज़ी अपनी सहीह में पैग़म्बरे इस्लाम
(स.) से रिवायत करते हैं, हज़रत ने फ़रमाया: यानी दुनिया फ़ना नही होगी, यहाँ तक
कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स तमाम अरब पर हुकुमत करेगा जिस का नाम मेरे नाम पर
होगा।
इमाम हम्बल बयान करते हैं रसूलल्लाह ने फ़रमाया ज़माना
बाक़ी रहेगा यहाँ तक कि मेरे अहलेबैत में से एक शख़्स तमाम अरब का मालिक क़रार
पायेगा। उसका नाम मेरे नाम पर होगा।[3]
सहीहे तिरमीज़ी मेंरसूलुल्लाह (स.) से इस तरह
रिवायत की गई है कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा जिसका नाम मेरे नाम पर
होगा।
अहमद अपनी मुस्नद में रसूलुल्लाह (स.) से रिवायत करते हैं
कि हुज़ूर (स.) ने फ़रमाया कि क़ियामत उस वक़्त तक नही आयेगी, जब तक कि मेरे
अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर न हो जाये और उसका नाम मेरे नाम पर होगा।
अबी सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि वह बयान करते हैं कि
हमें नबी ए करीम (स.) के बाद कोई हादेसः वाक़े होने का ख़ौफ़ दामनगीर था, चुनान्चे
हमने हज़रत से सवाल किया। आपने फ़रमाया मेरी उम्मत से महदी ज़हूर करेगा जो पाँच या
सात या नौ साल तक ज़िन्दगी गुज़ारेगा।[4]
अबु दाऊद पैग़म्बरे इस्लाम(स.) से रिवायत करते हैं हुज़ूर
ने फ़रमाया: अगर ज़माना एक रोज़ भी बाक़ी रहेगा यक़ीनन ख़ुदावन्दे आलम मेरे
अहलेबैत से एक शख़्स को ज़ाहिर करेगा जो दुनिया को अदल व इंसाफ़ से उसी तरह भर
देगा जिस तरह से वह उससे पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। (सहीहे अबी दाऊद)
अबू दाऊद पैग़म्बरे इस्लाम (स.) से रिवायत करते हैं कि
हज़रत ने फ़रमाया: दुनिया ख़त्म न होगी यहाँ तक कि मेरे अहले बैत से एक शख़्स तमाम
अरब का हाकिम क़रार पायेगा, उसका नाम मेरे नाम पर होगा। (अबू दाऊद का का बयान
दूसरी हदीस में इस तरह है) जो कि ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह
वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।
4.महदी
फ़रज़न्दे फ़ातिमा ज़हरा हैं।
अबू दाऊद उम्मे सलमा से रिवायत करते हैं कि उम्मे सलमा
फ़रमाती हैं कि मैने रसूलल्लाह (स.) को फ़रमाते सुना:
المهدی من عترتی من ولد فاطمة
महदी मेरी औलाद से फ़ातिमा का फ़रज़न्द है।
(सहीहे अबी दाऊद)
अबू दाऊद, अबी सईद ख़िदरी से रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह
(स.) ने फ़रमाया:
(मेरा महदी बलन्द पेशानी और बलन्द नाक वाला होगा। जो ज़मीन
को अदल व इंसाफ़ से इस तरह से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।
सहीहे बुख़ारी में अबू क़ुतादा अंसारी के ग़ुलाम नाफ़े से
रिवायत की गई है। वह बयान करता है कि अबू हुरैरा ने बयान किया कि रसूलल्लाह (स.)
ने फ़रमाया: उस वक़्त तुम क्या करोगे, जबकि तुम्हारे दरमियान इब्ने मरियम (हज़रतेईसा) नाज़िल होगें और तुम्हारा इमाम तुम लोगों में से होगा?
5.महदी
(अ.) अहले बैत से हैं।
सहीहे इब्ने माजा में रसूलल्लाह (स.) से रिवायत की गई है कि
हुज़ूर ने फ़रमाया: महदी अहलेबैत से होगा (जिसके ज़रिये) ख़ुदावन्दे आलम एक ही रात
में इस्लाह फ़रमायेगा।
सहीहे इब्ने माजा: में अनस इब्ने मालिक से रिवायत की
गई है कि मालिक बयान करता है कि मैने रसूलल्लाह (स.) को फ़रमाते सुना हज़रत ने
फ़रमाया: अब्दुल मुत्तलिब की औलाद में से मैं और हमज़ा व अली व जाफ़र, हसन व हुसैन
और महदी जन्नत वालों के सरदार हैं।
मुस्नदे अहमद बिन हम्बल:
में अबू सईद से रिवायत की गई है। वह बयान करते हैं कि रसूलल्लाह
(स.) ने फ़रमाया:(जब) ज़मीन ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी तो मेरी औलाद से एक शख़्स
ज़हूर करेगा जो 7 या 9 साल हुकुमत करेगा और ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा।
6.महदी
(अ.) आख़री ज़माने में आयेगें।
हाकिम नेशापुरी की मुसतदरक अस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी से
रिवायत की गई है। उनका बयान है कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने फ़रमाया आख़िरी ज़माने
में मेरी उम्मत पर उनके बादशाहों की जानिब से ऐसी शदीद मुसीबतें नाज़िल होगीं कि इससे
पहले उनसे ज़्यादा शदीद मुसीबत कभी न सुनी होगी। यहाँ तक कि ज़मीन उन पर तंग हो
जायेगी और ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी। मोमिन के लिए ज़ुल्म से महफ़ूज़ रहने के लिए
कोई पनागाह न होगी। पस ख़ुदावन्दे आलम मेरे अहले बैत से एक शख़्स को भेजेगा जो
ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।
अहले आसमान और अहले ज़मीन उससे ख़ुश होगें। ज़मीन अपने अनाज के दाने ज़खीरे न
करेगी, मगर उनके लिए निकाल देगी और आसमान भी बारिश के क़तरात न रोकेगा मगर ख़ुदावन्दे
आलम उन पर मूसलाधार पानी बरसायेगा। महदी उन लोगों के दरमियान 7 या 8 या 9 साल
ज़िन्दगी गुज़ारेगा उस ज़माने में ख़ुदा वंदे आलम की ख़ैर व बरकत देखकर मुर्दा लोग
ज़िन्दगी की ख़्वाहिश करेंगें।
मुसतदरके अहमद मेंअबू सईद ख़िदरी से
रिवायत की गई है कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: मैं तुम लोगों को महदी की बशारत
देता हूँ, जो मेरी उम्मत से है। लोगों के इख़्तेलाफ़ और ज़लज़लों के ज़माने में
ज़ाहिर होगा। वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर
से भरी होगी। ज़मीन व आसमान में बसने वाले उससे राज़ी होगें। लोगों के दरमियान माल
को हिस्सों में तक़सीम करेगा। एक शख़्स ने सवाल किया सहाहन क्या है ? आपने फ़रमाया: (यानी)
लोगों के दरमियान माल को (सही तरीक़े से) या मसावात व बराबरी के साथ तक़सीम करेगा।
हज़रत (स.) ने फ़रमाया और ख़ुदावन्दे आलम मुहम्मद (स.) की उम्मत के दिलों को
तवंगरी से भर देगा।
कनुज़ुल हक़ाइक़ मेंअल्लामा मनावी रिवायत करते हैं कि
रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: महदी जन्नत
वालों के ताऊस हैं।[5]
जामे उस सग़ीर मेंहाफ़िज़ सियुती (शाफ़ेई) रिवायत
करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: महदी मेरी औलाद से होगा, जिसकी पेशानी
चमकते सितारे की तरह होगी।
मुसनदे अहमद बिन हम्बल मेंइमाम अबू सईद ख़िदरी से
रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: उस वक़्त तक क़ियामत नही आएगी जब
तक मेरे अहले बैत से एक शख़्स, मेरी उम्मत में ज़ाहिर न होगा (और) वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस
तरह वह पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगीऔर
वह 7 साल हुकुमत करेगा।
अलमुस्तदरक अस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गई
है कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: क़ियामत नही आयेगी यहाँ तक कि ज़मीन ज़ुल्म व
जौर से और सरकशी से भर जायेगी। फिर मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़हूर करेगा और उसको
अदल व इंसाफ़ से भर देगा, जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।
यनाबी उल मवद्दत मेंक़तादा से रिवायत की गई है,
क़तादा बयान करते हैं कि मैने सईद इब्ने मुसैयब से पूछा कि क्या महदी का ज़हूर हक़
है? उसने
जवाब दिया हाँ, महदी औलादे फ़ातिमा (अ.) से बरहक़ हैं। मैने कहा महदी फ़ातिमा की
कौन औलाद हैं, जवाब मिला कि तुम्हारे लिए सिर्फ़ इतना ही काफ़ी है।
7.महदी
(अ.) का मुनकिर काफ़िर है।
हाफ़िज़ क़न्दोज़ी हनफ़ी यनाबी उल मवद्दत में जाबिर इब्ने
अब्दुल्लाह अंसारी से रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: जिस ने महदी
के ख़ुरूज से इंकार किया उसने (मुहम्मद और ईसा) पर नाज़िल शुदा उमूर का इंकार किया
और जिसने दज्जाल के ख़ुरूज का इंकार किया उसने भी कुफ़्र किया।[6]
यनाबी उल मवद्दत मेंहुज़ैफ़ा ए यमानी से रिवायत की गई
है कि हुज़ैफ़ा बयान करते हैं कि मैने रसूलल्लाह (स.) को यह फ़रमाते सुना: इस
उम्मत के ज़ालिमों पर वाये हो कि वह किस तरह मुसलमानों को क़त्ल करेगें और उनको
अपने वतनों से निकाल बाहर करेगें, सिवाये उस शख़्स के जो उनकी बात मानेगा और पैरवी
करेगा। पस मोमिन मुत्तक़ी उनके साथ ज़बानी तौर पर गुज़ारा करेगें और दिल से उनके
साथ न होगें। लेकिन जब ख़ुदावन्दे आलम इस्लाम को क़ुव्वत देना चाहेगा तो हर एक
जाबिर व ज़ालिम को ख़त्म कर डालेगा क्यों कि वह हर चीज़ पर क़ादिर है। वह उम्मत के
फ़ासिद होने के बाद उसकी इस्लाह फ़रमायेगा। ऐ हुज़ैफ़ा अगर दुनिया से सिर्फ़ एक
रोज़ बाक़ी रहेगा तो ख़ुदा उसको इतना तूलानी कर देगा कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स
हुकुमत करेगा और ख़ुदावन्दे आलम अपने वादे के ख़िलाफ़ नही करता और वह अपने वादे पर
क़ुदरत रखने वाला है।
8.महदी
(अ.) का ज़हूर क़ियामत से पहले होगा।
नूर उल अबसार में शबलख़ीमक़ातिल से और मुफ़स्सेरीन
से अल्लाह तआला के इस क़ौल (و انه لعم الساعة) के बारे में रिवायत
करते हैं कि इस आयत से महदी (अ.) मुराद हैं, जो आख़िरी ज़माने में ज़ाहिर होगें।
और उनके ज़हूर के बाद क़ियामत की निशानियाँ ज़ाहिर होगीं और क़ियामत आयेगी।
सईद बिन जबीर अल्लाह के इस क़ौल
(لیظهره
علی الدین کله و لو کره المشرکون)
की तफ़्सीर बयान
करते हैं कि आयत में औलादे फ़ातिमा (अ.) से महदी (अ.) मुराद हैं।
ग़राएबुल क़ुरआन मेंआयत
( وعد الله الذین آمنوا و عملوا الصلحات)
के ज़िम्न में वारिद हुआ है कि (रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया)
अगर दुनिया में सिर्फ़ एक रोज़ भी बाक़ी रहेगा तो ख़ुदावन्दे आलम उस दिन को इतना तूलानी कर देगा
कि मेरी उम्मत का एक शख़्स ज़हूर करेगा, जिसका नाम मेरे नाम पर होगा और उसकी
कुन्नियत मेरी कुन्नियत होगी वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह
वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।
9.महदी (अ.)
रसूलल्लाह की औलाद से हैं।
अलबयान अलकंजी(शाफ़ेई) में अबु सलमा बिन अब्दुर रहमान बिन
औफ़ से और उसने अपने बाप से रिवायत की है कि वह बयान करता है कि रसूलल्लाह (स.) ने
फ़रमाया: ख़ुदावन्दे आलम ज़रूर बिज़्ज़रूर मेरी इतरत से एक ऐसे शख़्स को मबऊस
करेगा, जिसके दाँत मुनासिब और मुरत्तब होगें, पेशानी कुशादा होगी वह ज़मीन को अदल
व इंसाफ़ से भर देगा और माल को बग़ैर हिसाब अता करेगा।
10.महदी (अ.) इमाम हुसैन (अ.) के
फ़रज़न्द हैं।
शरहे नहजुल बलाग़ा में इब्ने अबिल हदीद मोतज़ली बयान करता
है कि क़ाज़ीयुल कुज्ज़ात में इस्माईल बिन उबाद से इत्तेसाल के साथ अली इब्ने अबी
तालिब (अ.) से रिवायत की है कि अली (अ.) ने महदी का तज़केरा करते हुए फ़रमाया: वह हुसैन
की औलाद से है जिसकी पेशानी कुशादा होगी, नाक बुलंद होगी, पेट बड़ा होगा, दाँत
मुरत्तब होगें और दायें रूख़सार पर तिल होगा।
सहीहे इब्ने माजा में अलक़मा के वास्ते से अब्दुल्लाह से
रिवायत की गई है कि हम रसूलल्लाह (स.) की ख़िदमत में हाज़िर थे, उस वक़्त बनी
हाशिम का एक जवान वहाँ आया जैसे ही हज़रत की निगाह उस पर पड़ी आपकी आँख़ें अश्क
आलूद हो गईं और चेहरे का रंग बदल गया। मैने अर्ज़ की हुज़ूर आपका रंग क्यों बदल
गया ?
हज़रत (स.) ने फ़रमाया: हम अहले बैत के लिए ख़ुदावन्दे आलम ने आख़ेरत को दुनिया पर
तरजीह दी है और मेरे अहले बैत को अनक़रीब ज़ुल्म व सितम का सामना करना पड़ेगा।
उनको वतन से दूर किया जायेगा, यहाँ तक कि मशरिक़ की जानिब से एक गिरोह आयेगा और
उनके साथ सियाह परचम होगें, वह ख़ैर का सवाल करेगें लेकिन (वह ज़ालिम) कुछ न
देगें। वह गिरोह क़िताल करेगा और उनकी नुसरत की जायेगी जो कुछ वह सवाल करेगें उनको
देगें लेकिन वह गिरोह मंज़ूर न करेगा, यहाँ तक कि वह इस (अम्र) को मेरे अहलेबैत से
एक शख़्स के सुपुर्द करे देगें। पस वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा। जिस तरह
उन्होने उसे ज़ुल्म व जौर से पुर किया होगा। जो लोग, वह ज़माना पायेगें उसके क़रीब
आयेगें, अगरचे उनको बर्फ़ पर ही क्यो न चलना पड़े। (और बुरहान में कहा गया है कि
इससे मुराद महदी (अ.) हैं।
11.ख़ुदावन्दे आलम महदी (अ.) के
ज़रिये दीन कामिल फ़रमायेगा।
बयान उल कंजी(शाफ़ेई) में अली बिन जोशब से रिवायत की है,
अली बिन जोशब बयान करता है अली इब्ने अबी तालिब फ़रमाते हैं कि मैने रसूलल्लाह
(स.) से सवाल किया कि क्या आले मुहम्मद के महदी हम में से हैं या हमारे अलावा हैं? हज़रत ने फ़रमाया: ऐसा
नही है, बल्कि ख़ुदावन्दे आलम हम अहले बैत के सबब दीन (इस्लाम) को इख़्तेताम तक
पहुँचायेगा। जिस तरह उसने हमारे ही नबी (स.) के ज़रिये उसको कामयाब बनाया है और
हमारे ही ज़रिये लोग फ़ितने से महफ़ूज़ रहेगें। जिस तरह वह शिर्क से महफ़ूज़ रहे
और हमारी ही मुहब्बत के सबब अदावत के बाद उनके दिलों में मेल मुहब्बत और भाईचारगी
पैदा कर देगा। जिस तरह वह शिर्क की अदावत के बाद एक दूसरे के भाई क़रार पाये।
मुन्तख़ब कन्ज़ुल उम्माल:रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: अगर दुनिया में सिर्फ़ एक रोज़
बाक़ी रह जायेगा तो ख़ुदा वंदे आलम उस रोज़ को इतना तूलानी कर देगा कि मेरे अहले
बैत से एक शख़्स क़ुस्तुन्तुन्या और दैलम के पहाड़ों का हाकिम क़रार पायेगा।[7]
हाफ़िज़ अलक़न्दुज़ी अलहनफ़ी अबू सईद ख़िदरी से बतौरे
मरफ़ूअ रिवायत करते हैं, हुज़ूर (स.) में फ़रमाया: महदी हम अहले बैत में से हैं और
बलंद सर का हामिल है।वहज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा, जिस
तरह वह पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।
अलफ़ुसूलुल मुहिम्मा अल्लामा मालिकी बिन सबाग़ में अबू दाऊद
और तिरमीज़ी अपनी सुनन में अब्दुल्लाह बिन मसऊद से (बतौरे मरफ़ूअ) रिवायत करते हैं
कि अब्दुल्लाह बिन मसऊद बयान करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: अगर दुनिया
से एक रोज़ भी बाक़ी रह जायेगा तो ख़ुदावन्दे आलम उस रोज़ को इतना तूलानी कर देगा
कि मेरे अहले बैत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा, जिसका नाम मेरे नाम पर होगा। जो ज़मीन
को अदल व इंसाफ़ से इस तरह से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भर चुकी होगी।
अलकंजी (शाफ़ेई) अबूसईद ख़िदरी से रिवायत करते हैं कि
रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: आख़री ज़माने में फ़ितनों का ज़हूर होगा। (जिसके
दरमियान) महदी (अ.) नामी एक शख़्स ज़ाहिर होगा जिसकी अता व बख़्शिश मुबारक होगी।
यनाबी उल मवद्दत में इब्ने अब्बास से रिवायत की गई है
किइब्ने अब्बास बयान करते हैं कि रसूलल्लाह
(स.) ने फ़रमाया: इस दीन की कामयाबी अली (अ.) से हुई। अली (अ.) की
शहादत के बाद दीन में फ़साद बरपा होगा, जिसकी इस्लाह फ़क़त महदी (अ.) के ज़रिये
होगी।
यनाबी उल मवद्दत में अली इब्ने अबी तालिब से रिवायत की गई
है कि हज़रत ने फ़रमाया: दुनिया ख़त्म न होगी यहा तक कि मेरी उम्मत से एक शख़्स
हुसैन (अ.) के फ़रज़न्द से ज़ाहिर होगा और ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा, जिस
तरह वह ज़ुल्म व जौर से भर चुकी होगी।
हाशिया:हदीस शरीफ़ में बयान हुआ है कि इस दुनिया की
कामयाबी अली इब्ने अबी तालिब (अ.) के सबब हुई। मौजूदा हदीस में रसूलल्लाह (स.) ने
उन कलेमात की तरफ़ इशारा फ़रमाया जो आपने अली इब्ने अबी तालिब की फ़ज़ीलत में
इब्तेदाए इस्लाम में इरशाद फ़रमाये थे। मसलन:
रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: इस्लाम अली बिन अबी तालिब की
तलवार और ख़दीजा के माल से कामयाब हुआ।
ख़ंदक़ के रोज़ अली की ज़रबत दोनों जहान की इबादत से अफ़ज़ल
है।
मैं और अली इस उम्मत के बाप हैं।
जिस वक़्त अली इब्ने अबी तालिब अम्र इब्ने अब्दे वुद से जंग
करने के लिए निकले तो रसूलल्लाह (स.) ने फऱमाया: कुल्ले ईमान कुल्ले कुफ़्र के
मुक़ाबले में जा रहा है।
हुज़ूर ने जंगे ख़ंदक़ के वक़्त दुआ करते हुए ख़ुदावन्दे
आलम के हुज़ूर में इस तरह अर्ज़ किया, परवरदिगार !अगर तू चाहता है कि तेरी इबादत न
की जाये तो फिर तेरी इबादत कभी न होगी। (मुअल्लिफ़)
यनाबी उल मवद्दत मेंअली इब्ने अबी तालिब से रिवायत
की गई है कि हज़रत ने फ़रमाया: दुनिया
ख़त्म न होगी यहाँ तक कि मेरी उम्मत से एक शख़्स हुसैन के फ़रज़न्द से ज़ाहिर होगा
और ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा जिस तरह से वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।
यनाबी उल मवद्दत मेंहुज़ैफ़ा बिन यमान से रिवायत की
गई है कि हुज़ैफ़ा बयान करते हैं कि हमसे रसूलल्लाह (स.) ने ख़िताब करते हुए क़ियामत
तक होने वाले हालात की ख़बर दी और इस तरह इरशाद फ़रमाया: अगर दुनिया से सिर्फ़ एक
रोज़ बाक़ी रह जायेगा तो भी ख़ुदावन्दे आलम उस रोज़ को इतना तूलानी कर देगा कि
उसमे मेरी औलाद से एक शख़्स को मबऊस फ़रमायेगा, जिसका नाम मेरे नाम पर होगा। सलमान
ने अर्ज़ की, या रसूलल्लाह ! आप का वह कौन सा फ़रज़न्द होगा ?हुज़ूर ने इमाम हुसैन की
जानिब इशारा करते हुए फ़रमाया: मेरा वह फ़रज़न्द इसकी औलाद से होगा।
यनाबी उल मवद्दत मेंक़ुर्रतुज़ ज़नी के वास्ते से
रसूलल्लाह (स.) से रिवायत की गई है कि हुज़ूर ने फ़रमाया: जिस वक़्त ज़मीन ज़ुल्म
व जौर से भर जायेगी तो मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा और वह ज़मीन को अदल व
इंसाफ़ सेइस तरह भर देगा जिस तरह वह
ज़ुल्म व जौर से भर चुकी होगी।
यनाबी उल मवद्दत मेंपैग़म्बरे इस्लाम (स.) से
रिवायत की गई है कि हुज़ूर (स.) ने अली
इब्ने अबी तालिब (अ.) से फ़रमाया: ऐ अली! लोगों के हसद से परहेज़ करना जो मेरी वफ़ात के बाद ज़ाहिर
होगा। ऐसे लोगों पर ख़ुदावन्दे आलम लानत करता है और लानत करने वाले लानत करते हैं।
(इसके बाद रोते हुए फ़रमाया) मुझे जिबरईल ने ख़बर दी है कि यह लोग अली पर मेरे बाद
ज़ुल्म करेगें और यह ज़ुल्म क़ाइम के ज़हूर होने तक बाक़ी रहेगा। उन लोगों की
मक्कारी व अय्यारी ऊरूज पर होगी और उम्मत उन की मुहब्बत पर जमा न होगी। उनकी शान
कम होगी उनका इंकार करने वाला ज़लील होगा। उनकी तारीफ़ व मदह करने वालों की कसरत
होगी और यह उस वक़्त होगा जब शहर मुतग़य्यर हो जायेगें। बंदे कमज़ोर हो जायेगें और
नाउम्मीदी बढ़ जायेगी। उस वक़्त मेरी औलाद से क़ायम अल महदी (अ.) ज़हूर करेगा।ख़ुदावन्दे आलम उनकी
तलवार के ज़रिये हक़ को ज़ाहिर फ़रमायेगा और लोग उसकी रग़बत और ख़ौफ़ से पैरवी
करेगें। फिर हज़रत (अ.) ने फ़रमाया:
''ऐ लोगो, मैं तुमको बशारत देता हूँ, ख़ुदा का वादा हक़ है।
वह अपने वादे के ख़िलाफ़ हरगिज़ नही करता और उसका फ़ैसला कभी तबदील नही होता
क्योंकि वह हकीम व ख़बीर है। यक़ीनन अल्लाह की तरफ़ से कामयाबी क़रीब है।
परवरदिगार यह मेरे अहलेबैत हैं इन से हर तरह की कसाफ़त को दूर फ़रमा और उनकी नुसरत
फ़रमा और उनको इज़्ज़त अता कर ज़िल्लत से महफ़ूज़ रख और मुझे उनके दरमियान बाक़ी
रख इसलिए कि तू जो करना चाहता है उस पर क़ुदरत रखता है। ''
इब्ने असाकर की तारीख़े दमिश्क में इब्ने अब्बास की रिवायत
है कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: वह उम्मत किस तरह हलाक हो सकती है, जिसकी
इब्तेदा में मैं और आख़िर में ईसा और दरमियान में महदी हों।
हाशिया: मज़कूरा हदीस में रसूलल्लाह (स.) ने इरशाद फ़रमाया:
ईसा उम्मत के आख़िर में होगें। मुमकिन है हदीस का मतलब यह हो कि चूँकि हज़रत ईसा (अ.)
महदी (अ.) के ज़हूर के बाद आसमान से नाज़िल होगें, पस इस तरह ईसा (अ.) महदी (अ.)
से बाद में होगें। लिहाज़ा यह कहना सही है कि अव्वल रसूलल्लाह (स.) (स.) हैं और
वसत में महदी (अ.) और आख़िर में ईसा (अ.) हैं।
सुनने निसाई मेंपैग़म्बरे इस्लाम (स.) से रिवायत की गई है कि हुज़ूर ने फ़रमाया वह उम्मत कैसे हलाक हो सकती
है जिसके अव्वल में मैं हूँ, दरमियान में महदी (अ.) और आख़िरी में ईसा (अ.) हैं।
यनाबी उल मवद्दत में अबू
सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि वह बयान करते हैं मैं फ़ातिमा (अ.) की ख़िदमत
में उस वक़्त हाज़िर हुआ, जबकि पैग़म्बरे इस्लाम (स.) बीमार थे। शहज़ादी ने रोते
हुए अर्ज़ किया बाबा जान मैं आपके बाद ज़ाहिर होने वाले हालात से डरती हूँ। हुज़ूर
(स.) ने इरशाद फ़रमाया: ऐ फ़ातिमा ! ख़ुदावन्दे आलम ज़मीन वालों परनज़र की तो उसने तुम्हारे बाप को मुन्तख़ब किया
और रसूल बनाया, फिर दूसरी मर्तबा नज़र की तो उसने तुम्हारे शौहर को मुन्तखब किया
और मुझे हुक्म दिया कि मैं तुम्हारी शादी अली से कर दूँ, इस पर मैने तुम्हारी शादी
अली से की, जो मुसलमानों के दरमियान हिल्म के एतेबार से बुज़ुर्ग हैं, इल्म में
सबसे ज़्यादा हैं और इस्लाम में सबसे मुक़द्दम है। (यहा तक हुज़ूर (स.) ने
फ़रमाया) इस उम्मत में मेरे दो नवासे (हसन व हुसैन) तुम्हारे फ़रज़न्द हैं और इस
उम्मत में मेरा एक (फ़रज़ंद) महदी (अ.) होगा।
अबू हारूने अबदी कहता है वहब इब्ने मनिया ने बयान किया है
कि जब मूसा की आज़माइश इनकी क़ौम के ज़रिये हुई तो उनकी क़ौम ने बछड़े को अपना
ख़ुदा क़रार दिया। यह अम्र मूसा पर बहुत गराँ गुज़रा। ख़ुदा वन्दे आलम ने फ़रमाया:
ऐ मूसा तुम से क़ब्ल जितने भी अम्बिया हुए उन सबकी आज़माइश उनकी क़ौम के ज़रिये
हुई और मुहम्मद (स.) के बाद उनकी क़ौम एक बड़ी आज़माईश में मुब्तला होगी। यहाँ तक
कि वह एक दूसरे पर लानत करेगें। फिर ख़ुदावन्दे आलम उनकी मुहम्मद (स.) की औलाद से
एक शख़्स से इस्लाह फ़रमायेगा, जिसका नाम महदी होगा।
इब्ने अब्दुल बर अपनी किताब अल इसतिआब फ़ी असमाइल असहाब में
जाबिर सदफ़ी के वास्ते से पैग़म्बरे इस्लाम (स.) से रिवायत करते हैं कि हज़रत
मुहम्मद (स.) ने फ़रमाया: मेरी उम्मत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा जो ज़मीन को अदल व
इंसाफ़ से भर देगा।
यनाबी उल मवद्दत मवद्दत में अली इब्ने अबी तालिब (अ.) से
रिवायत की गई है कि हज़रत ने फ़रमाया अनक़रीब ख़ुदावन्दे आलम ऐसी क़ौम को लायेगा
जिन्हे ख़ुदा दोस्त रखता होगा और वह लोग भी ख़ुदा को दोस्त रखते होगें और ख़ुदा
वन्द उनमें से एक ग़रीब अजनबी को हुकुमत अता करेगा, पस वह महदी हैं, जिनका चेहरा
सुर्ख़ और बाल ज़र्द होगें, वह ज़मीन को बग़ैर किसी मशक़्क़त के अदल व इंसाफ़ से
भर देगें। वह अपने वालेदैन से बचपने में जुदा हो जायेगें।(लोगों) के नज़दीक अज़ीज़
होगें। मुसलमानोंके शहरों पर अमन व अमान
के साथ हुकुमत करेगें। लोग उनकी बात तवज्जोह से सुनेगें। जवान और बुढ़े इताअत
करेगें। वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह से भर देगें, जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर
से भरी होगी। उस वक़्त इमामत कामिल हो जायेगी। महदी की ख़िलाफ़त मुक़र्रर हो
जायेगी और ख़ुदा लोगों को उनकी क़ब्रों से ज़िन्दा उठायेगा। ज़मीन आबाद हो जायेगी,
और नहरें जारी होगीं, फ़ितना व ग़ारतगरी ख़त्म हो जायेगी और ख़ैर व बरकत में
इज़ाफ़ा होगा।
जुन्दल: या रसूलल्लाह हमने तौरेत
में इसी तरह देखा है, आप मुझे उनके नाम बताईये।
रसूलल्लाह ने फ़रमाया: सबसे पहले
मेरे वसी अली हैं। फिर उनके दो फ़रज़ंद हसन और हुसैन हैं। पस उन्ही से तुम वाबस्ता
रहना और जाहिलों की जिहालत तुम्हे ग़ुरूर में मुब्तला न कर दे और जब ज़ैनुल आबिदीन
की विलादत तुम्हारी वफ़ात वाक़े होगी और इस दुनिया से तुम्हारा आख़िरी रिज़्क़ दूध
होगा।
जुन्दल ने अर्ज़ की हमने तौरेत
में और अंबीया की दूसरी कुतुब में ऐलिया, शब्बर, शब्बीर के असमाँ देखे हैं जो कि
अली व हसन व हुसैन के असमाँ हैं। हुसैन के बाद कौन होगें? और उनके असमाँ क्या हैं?
रसूलल्लाह: और जब हुसैन की
मुद्दते इमामत होगी पस उनका फ़रज़ंद अली इमाम होगा। लक़्ब ज़ैनुल आबेदीन होगा और
उसके बाद उनका फ़रज़ंद मुहम्मद बाक़िर होगा और उसके बाद उसका फ़रज़ंद जाफ़रे
सादिक़ होगा और उसके बाद उनका फ़रज़ंद मूसा काज़िम होगा और उसके बाद उसका फ़रज़ंद
अली रेज़ा होगा और उसके बाद उसका फ़रजंद मुहम्मद तक़ी होगा और उसके बाद उसका
फ़रजंद अली नक़ी और हादी होगा और उसके बाद उसका फ़रज़ंद हसन असकरी होगा। उसके बाद
उसका फ़रज़ंद मुहम्मद महदी अलक़ायम वल हुज्जत होगा जो कि ग़ैबत इख़्तियार करेगा
फिर उसके बाद ज़ाहिर होगा और ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह
ज़ुल्म व जौर से भरी होगी उसकी ग़ैबत में सब्र करने वालों के लिये मुबारक बाद है
और उसकी मुहब्बत में मुत्तक़ीन के लिये मुबारक बाद है। यही वह लोग हैं
ख़ुदावंदेआलम ने अपनी किताब में जिनकी तारीफ़ इस तरह फरमाई है:هُدًى لِّلْمُتَّقِينَ ...... क़ुरआन जिसके मोजिज़ा होने में किसी शुब्ह की
गुन्जाईश नही है उन परहेज़गारों के लिये अज़ सर ता पा हिदायत है जो ग़ैब पर ईमान
रखते हैं।
यही लोग ख़ुदा का गिरोह हैं।
आगाह हो जाओ ख़ुदा का गिरोह ही कामयाब होने वाला है।
यनाबीऊल मवद्दत में अली बिन अबी
तालिब ने जंगे नहरवान के बाज़ ऐसे अज़ीम वाक़ेआत का ज़िक्र फ़रमाया जिसमें शदीद
क़िताल की ख़बर दी गयी थी और फ़रमाया यह अम्रे ख़ुदा से है और यह हालात ज़रूर पेश
आने वाले हैं। तुम कब तक इन्तेज़ार करोगे, मैं तुम्हे परवरदिगार की जानिब से
अन्क़रीब कामयाबी की बशारत देता हूँ, मैं अपने माँ बाप की क़सम खाकर कहता हूँ उनकी
तादाद कम होगी और उनकी असमाँ ज़मीन पर मजहूल होगें।
दो ग़ैबतें------यनाबीऊल मवद्दत
अली बिन अबी तालिब(अ) फ़रमाते
हैं: हमारे क़ायम की दो ग़ैबतें हैं, जिनमें से एक तूलानी होगी। उसकी इमामत पर
सिर्फ़ मोहकम और सही मारेफ़त का हामिल ही साबित क़दम रह सकेगा।[9]
अलबुरहान फ़ी अलामाते महदी
आख़िरुज़्ज़मान में अबु अब्दुल हुसैन बिन अली से रिवायत की गयी है। आप ने फ़रमाया:
महदी(अ) के लिये दो ग़ैबतें होगीं। जिनमें से एक इस क़दर तूलानी होगी कि बाज़ लोग
कहेगें कि महदी ने इन्तेक़ाल किया और बाज़ कहेंगें कि महदी चले गये और आपके जाए
क़याम के बारे में आपके ख़ादिम के सिवा किसी को ख़बर न होगी।[10]
यनाबीऊल मवद्दत में अली बिन अबी
तालिब से रिवायत की गयी है कि हज़रत ने महदी की सीरत के बारे में फऱमाया: महदी हम
अहले बैत से होगा जो दुनिया में रौशन चिराग़ की मानिन्द होगा जिसकी ज़िन्दगी
सालेहीन जैसी होगी। मुश्किलात को हल करेगा और मुश्किल में गिरफ़तार इँसान को उससे
निजात दिलाएगा। ज़ालिमों और काफ़िरों का इज्तेमा ख़त्म कर डालेगा और मुसलमानों में
इसलाह करेगा।
लव ला हुज्जतो लसाख़तिल अर्ज़
(अगर हुज्जते ख़ुदा न हो तो
ज़मीन धंस जायेगी)
हाफ़िज़ अल क़ंदूज़ी ने यनाबीऊल
मवद्दत में जाफ़र सादिक़(अ) से और उन्होने अपने वालिदे के वास्ते से अपने दादा अली
बिन हुसैन से रिवायत की इमाम ने फ़रमाया: हम मुसलमानों के इमाम हैं तमाम दुनिया के
मोमीनों पर ख़ुदा की जानिब से उसकी हुज्जत हैं। और मुसलमानों के मौला हैंऔर हम अहले ज़मीन के लिये उसी तरह अमान हैं जिस
तरह सितारे आसमान वालों के लिये अमान हैं। और हमारे ही सबब से आसमान ज़मीन पर
गिरने से टिका हुआ है। हमारे ही सबब बारिश होती है, रहमतें तक़सीम होती हैं। और
ज़मीन अपनी बरकतों को ज़ाहिर करती है अगर ज़मीन पर हम अहले बैत में से कोई न हो तो
ज़मीन अपने बसने वालों के साथ धंस जायेगी और जब से ख़ुदा वंदे आलम ने आदम को
ख़ल्क़ फ़रमाया है उस वक़्त से ज़मीन हुज्जते ख़ुदा से ख़ाली नही रही।
1-या तो वह
हुज्जत ज़ाहिर हो।
2-या पौशीदा
और ग़ायब हो।
क़ियामत तक ज़मीन हुज्जते ख़ुदा
से ख़ाली नही रह सकती। अगर ख़ुदा की हुज्जत न हो तो ख़ुदा की इबादत किस तरह होगी।
सुलेमान रावी ने इमाम जाफ़रे
सादिक़ (अ) से अर्ज़ की आक़ा पौशीदा और ग़ायब हुज्जत से लोग किस तरह फायदा हासिल
करेंगें इमाम ने फ़रमाया: जिस तरह लोग आफ़ताब से फ़ायदा हासिल करते हैं जबकि वह
बादलों में पोशीदा होता है।[11]
यनाबीऊल मवद्दत में हसन बिन
अली(अ) से रिवायत की गयी आपने फ़रमाया: जिस वक़्त क़ायम ज़हूर फ़रमायेंगें लोग
आपका इँकार करेंगें इसलिये कि जब ज़हूर फ़रमायेंगें नौजवान होंगें हालाँकि लोगों
को गुमान यह होगा कि आप बुढ़े हो चुके हैं।
यनाबीऊल मवद्दत मेंमुहम्मद बिन मुसलिम से
रिवायत की गयी वह बयान करता है मैने हज़रत इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) से अर्ज़ की
आक़ा इस आयत की तावील क्या है:
हज़रत ने फ़रमाया: जब इस आयत की
तावील आयेगी तो मुशरेकीन से क़ेताल किया जायेगा यहाँ तक कि वह ख़ुदा वंदे आलम की
वहदानीयत का इक़रार करें ताकि शिर्क बाक़ी न रहे और यह अमल क़ायम के ज़हूर के
वक़्त होगा।
रिफ़ाआ बिन मूसा बयान करता है
मैने इमाम सादिक़(अ) को इस आयत का तिलावत फ़रमाते हुए सुना:
हालाँकि आसमान जो फ़रिश्ते और
ज़मीन में जो लोग हैं वह सब उसके सामने खुशी से या नाख़ुशी से सरे तसलीम झुका चुके
हैं।
उसके बाद हज़रत ने फ़रमाया जब
क़ायम ज़हूर करेगा उस वक़्त ज़मीन के हर ख़ित्ते पर कलेमा ए ला इलाहा इल्ललाहा व
अन्ना मुहम्मदन रसूलुल्लाह की सदा बुलंद होगी।
यनाबीऊल मवद्दत में इमाम
बाक़िर(अ) से रिवायत की गयी हज़रत ने फ़रमाया: ख़ुदा वंदे आलम क़ायम के ज़हूर के
वक़्त इस्लाम को तमाम अदयान पर कामयाबी अता फ़रमायेगा।
यनाबीऊल मवद्दत में इमाम जाफ़र
सादिक़(अ) से रिवायत की गयी, हज़रत नें फ़रमाया: क़ायम के ज़हूर के वक़्त मोमिनीन
ख़ुदा की नुसरत से ख़ुश व ख़ुर्रम होंगें।
महदी(अ) के अंसार
सुनने इब्ने माजा, रसूलल्लाह(स)
इरशाद फ़रमाया: मशरिक़ से लोग ज़ाहिर होंगें और महदी की हुकुमत तसलीम करेंगें[14]
सबान ने इसआफ़ूर राग़ेबीन में
बयान किया है कि रिवायत में वारिद हुआ है इमाम महदी(अ) के ज़हूर के वक़्त एक मलक
आवाज़ देगा। यह महदी ख़ुदा का ख़लीफ़ा है पस तुम लोग इसकी इत्तेबा करो और महदी
इनताकिया के ग़ार से ताबूते सकीना निकालेंगें। और शाम के पहाड़ से तौरेत की
किताबों को निकालेंगें जिस की वजह से यहूदीयों पर आपकी हुज्जत क़ायम हो जायेगी। और
उनमें से अकसर लोग ईमान ले आयेगें।
बग़वी की किताब मसाबीहुस सुन्ना
में अबू सईद के वास्ते से पैग़म्बरे इस्लाम(स) से महदी के बारे में रिवायत की गयी
हुज़ूर ने फ़रमाया: एक शख़्स सवाल करेगा या महदी मुझे कुछ अता करें चुनाँचे आप इस
क़दर अता करेंगें जिस को वह संभालने रक क़ादिर नही होगा। और मुन्तख़बे कंज़ुल
उम्माल में इस तरह है। हज़रत में फ़रमाया: मेरी उम्मत से महदी ज़हूर करेगा जो पाँच
या सात या नौ साल ज़िन्दगी गुज़ारेगा उसके पास एक शख़्स आयेगा और कहेगा ऐ महदी
मुझे अता कीजीये आप उसको अपने लिबास से इस क़दर अता करेंगें जिसको वह उठा नही
सकेगा।
यनाबीऊल मवद्दत में अमीरुल
मोमिनीन अली बिन अबी तालिब से रिवायत की गयी हज़रत ने फ़रमाया नुसरते ख़ुदा उस
वक़्त तक नही आयेगी जब तक कि वह मौत से ज़्यादा आसान न हो जाये और उसी बारे में
परवरदिगारे आलम का क़ौल है:
ताकि जब वह पैग़म्बर अपनी इम्मत
वालों के ईमान लाने से मायूस हो गये और उम्मत वालों ने यह गुमान कर लिया कि उनके
झूट बोला गया है कि ख़ुदा उनकी मदद करेगा तो उस वक़्त हमारी मदद उनके पास आयेगी।
और यह उसी वक़्त होगा जब हमारा
क़ायम ज़हूर करेगा।
मुन्तख़ब कंज़ुल उम्माल में आँ
हज़रत(स) से रिवायत की गयी हज़रत ने फ़रमाया: हम अहले बैत ही की वह फ़र्द होगा
जिसकी इमामत में ईसा नमाज़ अदा करेंगें।
आँ हज़रत(स) ने इरशाद फ़रमाया:
जब महदी मुतवज्जेह होगें और ईसा बिन मरियम नाज़िल होगें और उनके बालों से पानी के
क़तरात टपक रहें होंगें, उस वक़्त इमाम महदी(अ) ईसा(अ) से फ़रमायेगें आप लोगों को
नमाज़ पढ़ाईये, ईसा फ़रमायेगें नमाज़ का क़याम आपके ज़रीये होगा। चुनाँचे ईसा मेरे
फ़रज़ंद महदी की इमामत में नमाज़ अदा करेगें।
की तफ़सीर इस तरह बयान की गयी कि
ईसा ज़मीन के पाक व पाकीज़ा मक़ाम(अफ़ीक़) पर नाज़िल होंगें। आपके हाथों में ख़ंजर
होगा जिससे आप दज्जाल को क़त्ल करेंगें उसके बाद आप बैतुल मुक़द्दस तशरीफ़
लायेगें। जबकि लोग नमाज़ सुबह पढ़ रहे होगें पस इमाम पीछे रहेंगें और ईसा इमाम को
आगे बढ़ायेगें और उनके पीछे नमाज़ अदा करेगें, ईसा की नमाज़ शरीअते मुहम्मदी पर
होगी।
महदी(अ.) का परचम
हाफ़िज़ क़ंदूज़ी की यनाबीऊल
मवद्दत में नौफ़ से रिवायत है वह बयान करता है इमाम महदी के परचम पर लिखा होगाالبیعة للهयानी बैअत सिर्फ़ अल्लाह के लिये मख़्सूस है।[17]
मुत्तक़ी हिन्दी इब्ने उमर से
रिवायत से करते हैं कि आँ हज़रत ने अली का हाथ अपने हाथों में लिया और फ़रमाया अली
के सुल्ब से एक जवान ज़ाहिर होगा जो दुनिया को अदल व इंसाफ़ से भर देगा पस जिस
वक़्त तुम यह देखो तो तुम तमीमी जवान के साथ हो जाना इसलिये कि यह शख़्स मशरिक़
वारिद होगा और महदी का अलमबरदार होगा।
रिवायत की गयी है कि इमाम हसन
असकरी(अ) के यहाँ एक बच्चे की विलादत हुई पस उन्होने उस बच्चे का नाम मुहम्मद रखा
और तीसरे रोज़ अपने असहाब के सामने लाये और फ़रमाया यह मेरे बाद तुम्हारा इमाम और
तुम पर मेरा ख़लीफ़ा है। यह वह क़ायम है जिसके इन्तेज़ार में गर्दने लंबा हो
जायेगीं पस जिस वक़्त ज़मीन ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी उस वक़्त ज़हूर करेगा और
उसको अदल व इंसाफ़ से भर देगा।
महदी से हर चीज़ ख़ुश होगी
आँ हज़रत से महदी के रुक्न और
मक़ाम के दरमियान बैअत और आपके शाम की जानिब से ज़हूर फ़रमाने की रिवायत की गयी
हज़रत ने फ़रमाया जिबरईल महदी के आगे और मीकाईल पीछे होगें। महदी से अहले आसमान व
ज़मीन, परिंदे, दरिंदे और समंदर की मछलीयाँ ख़ुश होगीं।
(अलबुरहान फ़ी अलामात महदी
आख़िरुज़्ज़मान)
अलामते ज़हूर
शबलंजी का नूरूल अबसार में अबू
जाफ़र(अ) से इमाम महदी के ज़हूर की अलामात से रिवायत की गयी है हज़रत ने फ़रमाया:
1- मर्द औरतों से मुशाबेहत
इख़्तियार करेंगें और औरतें मर्दों से।