मुल्ला मुहम्मद बाक़िर दामाद का इमामे अस्र अलैहिस्सलाम से इस्तेफ़ादा करना
हमारे अक्सर उलमा इल्मी मसाइल और
मज़हबी व मुआशरती मराहिल हज़रत इमामे ज़माना ही से तै करते हैं। मुल्ला मुहम्मद
बाक़िर दामाद जो हमारे अज़ीमुल क़द्र मुज़तहिद थे। उनके मुताअल्लिक़ है कि एक शब
आपने ज़रीहे नजफ़ अशरफ़ में एक मसला लिख कर डाला। उसके जवाब में तहरीरन कहा गया
हि तुम्हारा इमामे ज़माना इस वक़्त मस्जिदे कूफ़ा में नमाज़ गुज़ार है, तुम वहाँ
जाओ। वह वहाँ जा पहुँचें ख़ुद ब ख़ुद मस्जिद का दरवाज़ा खुल गया और आप अन्दर
दाखिल हो गये। आपने मसले का जवाब हासिल किया और आप मुतमइन होकर बरामद हुये।